पाठ्यक्रम

    1. १ - गौड़ीय वैष्णव धर्म

    2. २ - ज्ञान एवं उसकी प्राप्ति के साधन

    3. ३ - वेद

    4. ४ - ज्ञान का महत्त्व, अद्वैतवाद, द्वैतवाद

    5. ५ - आस्तिक एवं नास्तिक दर्शन

    6. ६ - पदार्थ - भाषा में शब्द का अर्थ

    7. ७ - सांख्य दर्शन

    8. ८ - स्थूल एवं सूक्ष्म शरीर

    9. ९ - इन्द्रियाँ एवं मन

    10. १० - सुख एवं दुःख

    11. ११ - शरीर का नियन्त्रण

    1. १ - शास्त्र ही जीवन का मूल है

    2. २ - शास्त्र की परिभाषा

    3. ३ - शास्त्र का विषय

    1. १ - हिन्दू धर्म का सिद्धान्त

    2. २ - दैवी एवं आसुरी प्रकृति

About this course

  • Free
  • 16 lessons

शिक्षक

सत्यनारायण दास बाबाजी

सत्यनारायण दास का जन्म 1954 में हुआ था, और बचपन से ही वे अपने देश भारत की आध्यात्मिक परंपराओं की ओर आकर्षित थे। 1978 में आईआईटी दिल्ली से स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने और अमेरिका में चार वर्ष तक कार्य करने के बाद वे भारत लौट आए। वहाँ उन्होंने अपने गुरु श्री हरिदास शास्त्री महाराज और स्वामी श्यामशरण महाराज के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में भारतीय दर्शन की छह पारंपरिक शाखाओं—षड्-दर्शन—का अध्ययन किया।

यह अध्ययन 25 वर्षों से अधिक समय तक पारंपरिक विधि से चलता रहा, और इसी दौरान वे भक्ति योग के एक साधक के रूप में स्वयं को समर्पित करते रहे। 1991 में उन्होंने वैष्णव संप्रदाय की पारंपरिक त्याग-परंपरा, बाबाजी-वेष, ग्रहण की। उनका मुख्य कार्य जीव गोस्वामी की रचनाओं पर केंद्रित रहा है, विशेष रूप से षट् सन्दर्भों के अंग्रेज़ी अनुवाद और उन पर टीका लेखन पर। उन्होंने चार शास्त्रीय उपाधियाँ भी अर्जित कीं, और आगरा विश्वविद्यालय से विधि (लॉ) की उपाधि तथा संस्कृत में पीएच.डी. प्राप्त की।

सत्यनारायण दास वृंदावन, भारत स्थित जीव इंस्टीट्यूट ऑफ वैष्णव स्टडीज़ के निदेशक हैं। वे रटगर्स, स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू जर्सी में विज़िटिंग प्रोफेसर के रूप में भी कार्यरत हैं। 2013 में भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा उन्हें वैदिक संस्कृति और दर्शन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने में उनके असाधारण योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

अंग्रेजी भाषा में विभिन्न वर्गों में पाठ्यक्रम